राजकिशोर साहु : पंचपरगनिया साहित्य के आधुनिक अंकुर
परिचय
पंचपरगनिया साहित्य के आधुनिक काल में राजकिशोर साहु का नाम एक प्रमुख कवि और लेखक के रूप में लिया जाता है। गद्य और पद्य दोनों विधाओं में उनकी लेखनी समान रूप से सशक्त है। जब पंचपरगनिया का नया शिष्ट साहित्य अंकुरित हो रहा था, तब साहु जी की रचनाओं ने उसे दिशा दी। उनकी पुस्तक “आंकूर” को आधुनिक पंचपरगनिया साहित्य का प्रारंभिक बीज माना जाता है।
जीवन परिचय और शिक्षा
20 अगस्त 1963 को राँची ज़िले के तमाड़ प्रखंड के पुंडीदीरी गाँव में राजकिशोर साहु का जन्म हुआ। पिता भैरव नाथ साहु और माता मुक्ता देवी ने उन्हें शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। उन्होंने बी.ए. तक की पढ़ाई की और शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्तमान में वे पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा स्थित एस.पी.जी. मिशन बालक मध्य विद्यालय में सहायक शिक्षक हैं।
साहित्यिक यात्रा
साहु जी की साहित्यिक प्रेरणा डॉ. करमचंद अहीर से मिली। उनके मार्गदर्शन में उन्होंने पंचपरगनिया भाषा में लेखन आरंभ किया। पंचपरगनिया भाषा विकास समिति से जुड़कर उन्होंने समसामयिक विषयों पर रचनाएँ कीं। राजनीति, शिक्षा, समाज की दशा, प्रेम और दर्शन जैसे विषय उनकी कविताओं और लेखों में प्रमुखता से आए।
प्रमुख कृतियाँ
- कविता संग्रह “आंकूर” (2004): इसमें लगभग 36 कविताएँ संकलित हैं, जैसे माँ, चरइ, प्रेमेंक बंधन, करिया बादइर, जागा, औकात, डहर, तोयं नारी आदि।
- कविता संग्रह “पाँच पात” (2016): इसमें लगभग 40 कविताएँ हैं, जिनमें परनाम, कड़क, हाय रे दाम, राजनीति, पाठशाला, मतदान, राखी, कलम, आगे बढ़ो आदि शामिल हैं।
- पंचपरगनिया सामान्य ज्ञान (2015): प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का संकलन।
- नाटक: पंडित और गड़ेरिया, खेल-खेल में।
- पत्रिकाओं में लेखन: बिहान पत्रिका में भोट केर कीमइत, डा. करमचंद अहीर, माँ महान हेके आदि।
साहित्यिक शैली
उनकी लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता है— साधारण विषयों को भी रोचक और सारगर्भित बना देना। गद्य और पद्य दोनों में उनकी पकड़ मजबूत है, किंतु कवि रूप में उनकी पहचान अधिक प्रखर है।
सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान
राजकिशोर साहु साहित्यकार होने के साथ-साथ समाजसेवी भी हैं। वे भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा), रेड क्रॉस सोसाइटी, रौनियार वैश्य समाज और पंचपरगनिया समिति, चाईबासा से जुड़े हुए हैं।
सम्मान
उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले:
- आदर्श शिक्षक सम्मान
- दैनिक भास्कर गुरु शिक्षा सम्मान
- अखड़ा सम्मान (2010, राँची)
- भारत गौरव अवार्ड (नई दिल्ली)
निष्कर्ष
राजकिशोर साहु ने पंचपरगनिया साहित्य को आधुनिक दृष्टि दी और इसे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनकी रचनाएँ पंचपरगनिया समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और आने वाली पीढ़ियाँ उनके योगदान को सदैव स्मरण करेंगी।
