बंशीधर महतो
बंशीधर महतो : पंचपरगनिया आधुनिक साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर प्रारंभिक जीवन और शिक्षा 1 फरवरी 1955 को राँची ज़िले के बुंडू थाना क्षेत्र के गाराम गाँव में बंशीधर महतो का जन्म हुआ। पिता का नाम घासीराम महतो और माता का नाम मिष्टो महतो था। बचपन में वे पढ़ाई से अधिक खेल-कूद और मवेशी चराने में रुचि रखते थे, किंतु झुमइर और भादर गीतों के प्रति उनका आकर्षण विशेष था। गाँव के शिक्षक उनकी प्रतिभा को पहचानते और उन्हें प्रोत्साहित करते थे। उन्होंने कांची स्कूल से मिडिल पास किया और आगे की पढ़ाई बुंडू हाई स्कूल से पूरी की। 1972 में उन्होंने मैट्रिक उत्तीर्ण किया और 1972-74 के बीच शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त किया। संघर्ष और साहित्यिक यात्रा नौकरी तुरंत न मिलने पर उन्होंने 1975 में बेड़ाडीह गाँव में एक छोटी दुकान खोली। यह दुकान धीरे-धीरे गीत-झुमइर का केंद्र बन गई, जहाँ मित्रों का जमावड़ा होता और गीत-संगीत का वातावरण बनता। इसी दौर में उन्होंने अपने भीतर के कवि को पहचाना और रचनाएँ लिखकर प्रकाशित करना शुरू किया। उनकी प्रारंभिक पुस्तकों में भरमर झंकार (टुसू गीत), आनंद कीर्तन, झुमइर संगीत और पंचपरगनिया पंचामृत शा…