डॉ. चन्द्रमोहन महतो

डॉ. चन्द्रमोहन महतो
डॉ. चन्द्रमोहन महतो : पंचपरगनिया साहित्य के आधार स्तंभ प्रारंभिक जीवन और शिक्षा 1 जून 1955 को तमाड़ थाना क्षेत्र के रागड़ाबाड़ांग गाँव में डॉ. चन्द्रमोहन महतो का जन्म हुआ। पिता का नाम बनवारी महतो और माता का नाम मंदोदरी देवी था। बचपन से ही वे अध्ययनशील और जिज्ञासु रहे। प्रारंभिक शिक्षा गाँव के विद्यालय से, फिर सारजमडीह मिडिल स्कूल और नावाडीह उच्च विद्यालय से मैट्रिक (1973) उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई बिरसा कॉलेज, खूंटी से आई.ए. और बी.ए. तथा 1983 में हिंदी विषय से एम.ए. की।   ज्ञान-पिपासा शांत न होने पर उन्होंने पीएच.डी. करने का संकल्प लिया। डॉ. रामदयाल मुंडा के निर्देशन में उन्होंने “कुड़माली भाषा का व्याकरण” विषय पर शोध किया और 1990 में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।   शिक्षण और साहित्य सेवा वर्तमान में वे पाँचपरगना किसान महाविद्यालय, बुंडू में व्याख्याता हैं। मातृभाषा कुड़माली होने के बावजूद उन्होंने पंचपरगनिया भाषा को समान महत्व दिया और इसके विकास में अपना जीवन समर्पित किया। उनकी कलम से गद्य और पद्य दोनों विधाओं में विपुल साहित्य सृजित हुआ है।   प्रमुख कृतियाँ उनकी प्रकाशित पुस्तकों में शामिल…