भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) की धारा 94 से 110 तक

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA, 2023) की धारा 94 से 110 तक 

9️⃣4️⃣ धारा 94 – 📜 तीस वर्ष पुराने दस्तावेज़ों के बारे में उपधारणा (Presumption as to documents 30 years old) (यदि कोई दस्तावेज़ 30 साल पुराना है और उचित कस्टडी/स्थान से आता है, तो अदालत मान लेगी कि उस पर हस्ताक्षर और लिखावट असली है - पुरानी IEA 90)

9️⃣5️⃣ धारा 95 – 💻 पाँच वर्ष पुराने इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के बारे में उपधारणा (Presumption as to electronic records 5 years old) (यदि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड 5 साल पुराना है और सही कस्टडी से आता है, तो डिजिटल हस्ताक्षर असली माने जाएंगे - पुरानी IEA 90A)


🤐 अध्याय VI: दस्तावेज़ी साक्ष्य द्वारा मौखिक साक्ष्य का अपवर्जन (Exclusion of Oral by Documentary Evidence) (Sections 96–105)

(इस अध्याय का मुख्य नियम यह है कि यदि कोई बात लिखित दस्तावेज़ में दर्ज है (जैसे कॉन्ट्रैक्ट या सेल डीड), तो उसे साबित करने के लिए 'मौखिक गवाही' (मुंह जुबानी बातें) नहीं मानी जाएगी, केवल दस्तावेज़ ही दिखाना होगा)

9️⃣6️⃣ धारा 96 – 📝 संविदाओं (Contracts), अनुदानों (Grants) और संपत्ति के अन्य निपटारों के निबंधनों (Terms) का साक्ष्य जिन्हें दस्तावेज़ के रूप में लेखबद्ध किया गया है (पुरानी IEA 91)

9️⃣7️⃣ धारा 97 – 🚫 मौखिक करार (Oral agreement) के साक्ष्य का अपवर्जन (यदि लिखित कॉन्ट्रैक्ट है, तो यह साबित करने के लिए मौखिक गवाही नहीं दी जा सकती कि "हमने तो मुंह से कुछ और तय किया था" - पुरानी IEA 92)

9️⃣8️⃣ धारा 98 – ❓ संदिग्ध दस्तावेज़ (Ambiguous document) को स्पष्ट करने या उसमें संशोधन करने के लिए साक्ष्य का अपवर्जन (Patent Ambiguity - यदि दस्तावेज़ देखते ही समझ आ रहा है कि उसमें गलती है या बात अधूरी है, तो उसे मौखिक गवाही से ठीक नहीं किया जा सकता - पुरानी IEA 93)

9️⃣9️⃣ धारा 99 – 🛑 विद्यमान तथ्यों (Existing facts) पर दस्तावेज़ के लागू होने के विरुद्ध साक्ष्य का अपवर्जन (पुरानी IEA 94)

1️⃣0️⃣0️⃣ धारा 100 – 🧩 विद्यमान तथ्यों के संदर्भ में अर्थहीन (Unmeaning) दस्तावेज़ के बारे में साक्ष्य (Latent Ambiguity - यदि दस्तावेज़ पढ़ने में एकदम सही है लेकिन असलियत में लागू नहीं हो रहा, तब उसे समझाने के लिए मौखिक साक्ष्य दिया जा सकता है - पुरानी IEA 95)

1️⃣0️⃣1️⃣ धारा 101 – 👥 ऐसी भाषा के लागू होने के बारे में साक्ष्य जो कई व्यक्तियों में से केवल एक पर ही लागू हो सकती है (पुरानी IEA 96)

1️⃣0️⃣2️⃣ धारा 102 – ⚖️ ऐसी भाषा के लागू होने के बारे में साक्ष्य जो तथ्यों के दो समूहों में से किसी एक पर लागू होती है, लेकिन दोनों पर पूरी तरह से नहीं (पुरानी IEA 97)

1️⃣0️⃣3️⃣ धारा 103 – 🔍 न पढ़े जा सकने वाले अक्षरों (Illegible characters), विदेशी या अप्रचलित शब्दों आदि के अर्थ के बारे में साक्ष्य (पुरानी IEA 98)

1️⃣0️⃣4️⃣ धारा 104 – 🗣️ दस्तावेज़ के निबंधनों में फेरबदल (Varying terms) करने वाले करार का साक्ष्य कौन दे सकेगा (जो व्यक्ति दस्तावेज़ का पक्षकार नहीं है, वह दे सकता है - पुरानी IEA 99)

1️⃣0️⃣5️⃣ धारा 105 – 📜 वसीयतों (Wills) के निर्माण से संबंधित भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम (Indian Succession Act) के प्रावधानों का बचाव (पुरानी IEA 100)


⚖️ भाग IV - साक्ष्य का पेश किया जाना और प्रभाव (Production and Effect of Evidence)

🏋️‍♂️ अध्याय VII: सबूत का भार (Burden of Proof) (Sections 106–110)

(यह पूरी कानूनी प्रक्रिया का बहुत महत्वपूर्ण अध्याय है, जो तय करता है कि अदालत में अपनी बात साबित करने की ज़िम्मेदारी या भार (Burden) किसकी होगी)

1️⃣0️⃣6️⃣ धारा 106 – ⚖️ सबूत का भार (Burden of proof) (जो व्यक्ति चाहता है कि अदालत किसी कानूनी अधिकार या दायित्व पर उसके पक्ष में फैसला दे, उसे ही तथ्य साबित करने होंगे। सामान्यतः क्रिमिनल केस में यह भार अभियोजन/Prosecution पर होता है - पुरानी IEA 101)

1️⃣0️⃣7️⃣ धारा 107 – 👈 सबूत का भार किस पर होता है (On whom burden of proof lies) (सबूत का भार उस व्यक्ति पर होता है जो यदि दोनों पक्षों की ओर से कोई साक्ष्य न दिया जाए, तो मुक़दमा हार जाएगा - पुरानी IEA 102)

1️⃣0️⃣8️⃣ धारा 108 – 🎯 किसी विशिष्ट तथ्य (Particular fact) के बारे में सबूत का भार (जैसे यदि आरोपी 'Plea of Alibi' यानी अपराध के समय किसी अन्य शहर में होने का दावा करता है, तो उसे ही यह साबित करना होगा - पुरानी IEA 103)

1️⃣0️⃣9️⃣ धारा 109 – 🔗 साक्ष्य को ग्राह्य (Admissible) बनाने के लिए साबित किए जाने वाले तथ्य को साबित करने का भार (पुरानी IEA 104)

1️⃣1️⃣0️⃣ धारा 110 – 🛡️ यह साबित करने का भार कि आरोपी का मामला अपवादों (Exceptions) के अंतर्गत आता है (यदि आरोपी कहता है कि उसने 'सेल्फ-डिफेंस' में मारा है या वह पागल था, तो अदालत मानकर चलेगी कि अपवाद नहीं था, यह साबित करने का भार खुद आरोपी पर होगा - पुरानी IEA 105)



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