यहाँ भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA, 2023) के सबसे महत्वपूर्ण और व्यावहारिक अध्यायों में से एक (अध्याय X: गवाहों की परीक्षा)
⚖️ अध्याय X: गवाहों की परीक्षा (Examination of Witnesses) – Chapter X
(यह अध्याय तय करता है कि अदालत में मुक़दमे की सुनवाई (Trial) के दौरान गवाहों से सवाल-जवाब किस क्रम में और कैसे किए जाएंगे)
🗣️ गवाहों की परीक्षा का क्रम (Order of Examination) (Sections 143–148)
1️⃣4️⃣3️⃣ धारा 143 – 📄 गवाहों को पेश करने और उनकी परीक्षा का क्रम (Order of production and examination)
1️⃣4️⃣4️⃣ धारा 144 – 👨⚖️ साक्ष्य की ग्राह्यता (Admissibility of evidence) के बारे में न्यायाधीश निर्णय लेगा
1️⃣4️⃣5️⃣ धारा 145 – 🗣️ गवाहों की परीक्षा (Examination of Witnesses): (पुरानी IEA 137)
मुख्य परीक्षा (Examination-in-chief): जो पक्षकार गवाह को बुलाता है, वह सबसे पहले उससे सवाल पूछता है।
जिरह (Cross-examination): इसके बाद विरोधी पक्षकार गवाह से सवाल पूछता है (ताकि वह उसकी गवाही की सच्चाई परख सके)।
पुनः परीक्षा (Re-examination): जिरह के बाद, गवाह को बुलाने वाला पक्षकार ज़रूरत पड़ने पर फिर से सवाल पूछ सकता है।
1️⃣4️⃣6️⃣ धारा 146 – 🔄 परीक्षाओं का क्रम (पहले मुख्य परीक्षा, फिर जिरह, और अंत में पुनः परीक्षा होगी)
1️⃣4️⃣7️⃣ धारा 147 – 📦 केवल दस्तावेज़ पेश करने के लिए बुलाए गए व्यक्ति से जिरह नहीं की जा सकती, जब तक कि उसे गवाह के रूप में न बुलाया गया हो
1️⃣4️⃣8️⃣ धारा 148 – 🎭 चरित्र (Character) के गवाहों से भी जिरह और पुनः परीक्षा की जा सकेगी
❓ सूचक प्रश्न (Leading Questions) (Sections 149–151)
(सूचक प्रश्न वे होते हैं जिनमें सवाल के अंदर ही जवाब छिपा होता है, जैसे: "क्या तुमने रमेश को चाकू मारते हुए देखा था?" - इसके बजाय सही सवाल होगा "तुमने वहां क्या देखा?")
1️⃣4️⃣9️⃣ धारा 149 – ❓ सूचक प्रश्न (Leading questions) क्या होते हैं (पुरानी IEA 141)
1️⃣5️⃣0️⃣ धारा 150 – 🛑 मुख्य परीक्षा और पुनः परीक्षा में सूचक प्रश्न नहीं पूछे जाने चाहिए (यदि विरोधी पक्ष आपत्ति करे)
1️⃣5️⃣1️⃣ धारा 151 – ✔️ जिरह (Cross-examination) में सूचक प्रश्न पूछे जा सकते हैं
🕵️♂️ जिरह में पूछे जाने वाले प्रश्न (Questions in Cross-Examination) (Sections 152–161)
1️⃣5️⃣2️⃣ धारा 152 – 📝 पूर्व के लिखित दस्तावेज़ों (Matters in writing) के बारे में मौखिक साक्ष्य
1️⃣5️⃣3️⃣ धारा 153 – 📜 पूर्व के लिखित बयानों (जैसे FIR या पुलिस को दिए गए बयान) के बारे में जिरह करना
1️⃣5️⃣4️⃣ धारा 154 – ⚖️ जिरह में कौन से प्रश्न विधिपूर्ण (Lawful) हैं (जैसे गवाह की सच्चाई परखना, उसकी स्थिति जानना या उसके चरित्र पर प्रहार करके उसकी विश्वसनीयता जाँचना)
1️⃣5️⃣5️⃣ धारा 155 – 🤐 गवाह को उत्तर देने के लिए कब विवश (Compel) किया जाएगा
1️⃣5️⃣6️⃣ धारा 156 – 👨⚖️ न्यायालय तय करेगा कि कब गवाह से सवाल पूछा जाए और कब उसे उत्तर देने के लिए विवश किया जाए
1️⃣5️⃣7️⃣ धारा 157 – 🛑 उचित आधार (Reasonable grounds) के बिना प्रश्न न पूछा जाना
1️⃣5️⃣8️⃣ धारा 158 – 🏛️ यदि वकील उचित आधार के बिना सवाल पूछता है, तो न्यायालय द्वारा उच्च न्यायालय या बार काउंसिल को रिपोर्ट करना
1️⃣5️⃣9️⃣ धारा 159 – 🤬 अशिष्ट और कलंकात्मक प्रश्नों (Indecent and scandalous questions) पर रोक (न्यायालय ऐसे सवाल पूछने से मना कर सकता है)
1️⃣6️⃣0️⃣ धारा 160 – 🥴 अपमानित करने या परेशान करने के इरादे से पूछे गए प्रश्नों पर रोक
1️⃣6️⃣1️⃣ धारा 161 – ❌ गवाह की सत्यवादिता परखने वाले प्रश्नों के उत्तरों का खंडन करने के लिए साक्ष्य का अपवर्जन (यानी यदि गवाह किसी निजी सवाल का जवाब दे दे, तो उस जवाब को झूठा साबित करने के लिए अलग से सबूत नहीं लाए जा सकते)
🔄 पक्षद्रोही गवाह और विश्वसनीयता (Hostile Witness & Impeaching Credit) (Sections 162–166)
1️⃣6️⃣2️⃣ धारा 162 – 🎭 पक्षकार द्वारा अपने ही गवाह से प्रश्न पूछना (Hostile Witness / मुकर जाना): (जब आपका अपना ही गवाह अदालत में जाकर पलट जाए या आपके खिलाफ बोलने लगे, तो न्यायालय की अनुमति से आप अपने ही गवाह से 'जिरह' कर सकते हैं - पुरानी IEA 154)
1️⃣6️⃣3️⃣ धारा 163 – 🎯 गवाह की विश्वसनीयता पर प्रहार (Impeaching credit of witness): (गवाह को झूठा साबित करने के तरीके - जैसे यह साबित करना कि गवाह ने रिश्वत ली है, या उसने पहले कुछ और कहा था - पुरानी IEA 155)
1️⃣6️⃣4️⃣ धारा 164 – 🤝 सुसंगत तथ्य के साक्ष्य की पुष्टि (Corroboration) करने वाले प्रश्न पूछना
1️⃣6️⃣5️⃣ धारा 165 – 🔄 गवाही की पुष्टि के लिए उसी तथ्य के पूर्व कथनों (Former statements) को साबित करना (जैसे गवाह ने जो बात पुलिस को बताई थी, वही अदालत में बताई है)
1️⃣6️⃣6️⃣ धारा 166 – ⚰️ मृत्युकालिक कथन (Dying declaration) या धारा 26/33 के बयानों को साबित करने के संबंध में अन्य बातें साबित करना
📓 स्मृति ताज़ा करना और न्यायालय की शक्ति (Refreshing Memory & Judge's Power) (Sections 167–169)
1️⃣6️⃣7️⃣ धारा 167 – 📓 स्मृति ताज़ा करना (Refreshing memory): (यदि घटना बहुत पुरानी है, तो गवाह न्यायालय की अनुमति से अपनी डायरी, नोट्स या कोई दस्तावेज़ देखकर अपनी याददाश्त ताज़ा कर सकता है - पुरानी IEA 159)
1️⃣6️⃣8️⃣ धारा 168 – 📄 स्मृति ताज़ा करने के लिए उपयोग किए गए दस्तावेज़ में लिखे तथ्यों की गवाही देना
1️⃣6️⃣9️⃣ धारा 169 – ⭐ न्यायाधीश की प्रश्न पूछने या दस्तावेज़ पेश कराने की शक्ति (Judge's power to put questions): (यह बहुत शक्तिशाली धारा है। सच्चाई तक पहुंचने के लिए जज किसी भी गवाह से, किसी भी रूप में, कोई भी सवाल पूछ सकता है और कोई भी दस्तावेज़ मंगा सकता है। पक्षकार जज के सवालों पर जिरह नहीं कर सकते - पुरानी IEA 165)
⚖️ अध्याय XI: साक्ष्य के अनुचित ग्रहण और अग्रहण के विषय में (Improper Admission and Rejection of Evidence)
1️⃣7️⃣0️⃣ धारा 170 – ❌ साक्ष्य के अनुचित ग्रहण या अग्रहण के कारण कोई नया विचारण (New trial) नहीं होगा: (यह BSA की सबसे अंतिम धारा है। इसके अनुसार, यदि अदालत ने गलती से कोई साक्ष्य स्वीकार कर लिया है या कोई साक्ष्य लेने से मना कर दिया है, तो केवल इसी आधार पर पूरा मुक़दमा दोबारा नहीं चलाया जाएगा, बशर्ते कि उस साक्ष्य के बिना भी फैसले के लिए पर्याप्त सबूत हों - पुरानी IEA 167)
