अनंत महतो

अनंत महतो
अनंत महतो : पंचपरगनिया साहित्य और संस्कृति के सशक्त स्तंभ परिचय और साहित्यिक योगदान अनंत महतो पंचपरगनिया साहित्य के ऐसे दीपक हैं, जिनकी लेखनी ने पूरे पाँचपरगना क्षेत्र को आलोकित किया है। उनकी रचनाओं की विशेषता है— व्यंग्य के माध्यम से गूढ़ और कड़वे सत्य को उजागर करना। हिंदी, अंग्रेजी, नागपुरी, सादरी और कुरमाली जैसी भाषाओं के ज्ञाता होने के बावजूद उन्होंने अपनी मातृभाषा पंचपरगनिया को ही साहित्यिक अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। वे कवि, निबंधकार, कहानीकार और एकांकीकार के रूप में स्थापित हुए हैं और साथ ही एक उच्च कोटि के संस्कृति कर्मी भी हैं।   जन्म, शिक्षा और कार्यक्षेत्र 1 जुलाई 1960 को राँची ज़िले के तमाड़ थाना क्षेत्र के गुटीबारू गाँव में अनंत महतो का जन्म हुआ। माता का नाम गंधीबाला देवी और पिता का नाम लक्ष्मीनारायण महतो था। बचपन से ही उनका मन पढ़ाई और गीत-संगीत में रमता था। उन्होंने राँची विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में बी.ए. किया और बेसिक ट्रेनिंग भी पूरी की।   1991 में वे अवर शिक्षा सेवा (प्राथमिक) में सरकारी सेवा से जुड़े। उन्होंने खगड़िया, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला, गुमला, सिमडेगा और खू…