रामसाय महतो
रामसाय महतो : पंचपरगना के गीत-गोविंदमय साधक परिचय पंचपरगनिया मध्यकालीन लोकसंगीत की चर्चा होते ही जिन नामों का स्मरण सहज ही हो जाता है, उनमें रामसाय महतो एक प्रमुख पहचान हैं। उन्होंने पंचपरगना के वातावरण को “गीत-गोविंदमय” बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई और अपना संपूर्ण जीवन लोकगीत, संगीत और संस्कृति के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। पंचपरगनिया लोकगीतों को गुमनामी से निकालकर समाज के सामने उनकी सांस्कृतिक पहचान स्थापित करना उनका अमूल्य योगदान है। प्रारंभिक जीवन 1930 ई. में राँची ज़िले के सिल्ली थाने के कोंचो गाँव में उनका जन्म हुआ। पिता का नाम सोहन महतो और माता का नाम पातुआ देवी था। शिक्षा की सीमित सुविधाओं के कारण वे केवल सातवीं कक्षा तक ही पढ़ सके, किंतु बचपन से ही उनका मन गीत-संगीत में रमता था। छोटी उम्र में ही उनके नृत्य-गान ने लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। संगीत साधना संगीत की गहराइयों को जानने की उत्कंठा उन्हें उस समय के प्रसिद्ध संगीत प्रेमी और लोकगीत उस्ताद राजा उपेन्द्रनाथ सिंहदेव के पास ले गई। राजा साहब ने उनके मातृभाषा प्रेम और समर्पण को पहचानकर उन्हें शिष्य बनाया और लोकगीत-संगीत …