शक्तिधर अधिकारी

शक्तिधर अधिकारी : पंचपरगनिया साहित्य के अग्रज रचनाकार

जन्म और शिक्षा

5 जनवरी 1940 को राँची ज़िले के बुंडू प्रखंड के गोसाईंडीह गाँव में शक्तिधर अधिकारी का जन्म हुआ। पिता का नाम रामेश्वर दास अधिकारी और माता का नाम बिंदा देवी था। बचपन से ही वे पढ़ाई में रुचि रखते थे। प्रारंभिक शिक्षा काँची स्कूल से हुई और वहीं से मिडिल परीक्षा उत्तीर्ण की।  

1955 ई. में उन्होंने बुंडू हाई स्कूल से मैट्रिक पास किया। आगे की पढ़ाई के लिए वे टाटा कॉलेज, चाईबासा गए, किंतु पारिवारिक विवादों के कारण आई.ए. की परीक्षा नहीं दे सके। इसके बाद उन्होंने 1959-61 में बुंडू शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय से प्रशिक्षण प्राप्त किया और 1962 में एक माध्यमिक विद्यालय में सरकारी सेवा शुरू की।  

साहित्यिक जागरण

सरकारी सेवा के साथ-साथ उनके भीतर का साहित्यकार सक्रिय रहा। पंचपरगनिया भाषा विकास समिति के गठन के समय वे भी साहित्य और संगीत सृजन में जुट गए। वे सहज ही गीत और कविताएँ रच देते थे। उनकी रचनाएँ बिहान, आदिवासी और जनमानस पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं।  

- बिहान पत्रिका में उनके निबंध “योग और भक्ति” तथा “शाकाहार का महत्व” प्रकाशित हुए।  

- गद्य-पद्य संग्रह में उनकी कविता “दुख” शामिल है।  

उन्होंने पंचपरगनिया कहावतों, मुहावरों, पहेलियों, मंत्रों, लोककथाओं और लोकगीतों का संकलन किया। पंचपरगनिया शब्दकोष के निर्माण में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है।  

साहित्यिक शैली

उनकी रचनाओं में आध्यात्मिकता की गहरी छाप मिलती है।  

- योग और भक्ति निबंध में उन्होंने योग और भक्ति को परमात्मा तक पहुँचने के दो माध्यम बताया।  

- शाकाहार का महत्व में उन्होंने जीवों के प्रति करुणा और अहिंसा का संदेश दिया।  

उनकी लेखनी ने पंचपरगनिया गद्य-पद्य की कमी को पूरा किया और साहित्य को नई दिशा दी।  

संगठनात्मक योगदान और व्यक्तित्व

शक्तिधर अधिकारी ने पंचपरगनिया भाषा विकास समिति में लगातार तीन बार कोषाध्यक्ष का पद संभाला। वे शतरंज और फुटबॉल के अच्छे खिलाड़ी भी रहे।  

उनकी पहचान रही— हल्की मुस्कान और गंभीर विषयों को भी सहज हास्य में प्रस्तुत करना।  

2000 ई. में सेवानिवृत्ति के बाद भी वे साहित्य, संगीत और समाज सेवा में सक्रिय हैं। वे नए रचनाकारों के मार्गदर्शक बने हुए हैं।  

विरासत

उनकी रचनाओं का प्रसारण आकाशवाणी राँची से होता रहा है। अनेक रचनाएँ अब भी अप्रकाशित हैं, जिनका प्रकाशन आवश्यक है। आने वाले समय में उनकी रचनाएँ पंचपरगनिया आधुनिक शिष्ट साहित्य का आधार स्तंभ बनेंगी।  

शक्तिधर अधिकारी को पंचपरगना का अग्रज रचनाकार और मार्गदर्शक कहना पूर्णतः उचित है।  



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