झारखण्ड की विद्युत परियोजनाएँ: सम्पूर्ण नोट्स

झारखण्ड की ऊर्जा संरचना में ताप विद्युत (Thermal Power) का दबदबा है। राज्य की कुल स्थापित क्षमता का लगभग 90% हिस्सा कोयले पर आधारित है।

​राज्य की विद्युत क्षमता (आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार)

​कुल स्थापित क्षमता: 2,490 मेगावाट (2.49 GW)

ऊर्जा स्रोत

क्षमता (MW)

हिस्सेदारी (लगभग)

ताप विद्युत (Thermal)

2,250 MW

90.3%

जल विद्युत (Hydel)

130 MW

5.2%

नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable)

110 MW

4.5%

1. ताप विद्युत परियोजनाएँ (Thermal Power Projects)

​झारखण्ड में कोयले की प्रचुरता के कारण ताप विद्युत मुख्य स्रोत है।

  • दामोदर घाटी निगम (DVC) के अधीन:
    • बोकारो ताप विद्युत गृह: यह कोयला आधारित राज्य का प्रमुख केंद्र है।
    • चन्द्रपुरा ताप विद्युत गृह (बोकारो): DVC द्वारा संचालित।
    • कोडरमा ताप विद्युत गृह: आधुनिक तकनीक से लैस।
  • राज्य/NTPC के सहयोग से:
    • पतरातु ताप विद्युत गृह (रामगढ़): यह पूर्व में रूस के सहयोग से बना था, अब NTPC और झारखण्ड सरकार के संयुक्त उपक्रम (PVUNL) के तहत इसका नवीनीकरण हो रहा है।
    • उत्तरी कर्णपुरा ताप विद्युत परियोजना (चतरा): यह NTPC की एक प्रमुख परियोजना है।
    • तेनुघाट ताप विद्युत गृह (बोकारो): यह पूर्णतः झारखण्ड सरकार के नियंत्रण में है।

​2. जल विद्युत परियोजनाएँ (Hydel Power Projects)

​जल विद्युत का उत्पादन मुख्यतः नदियों पर बने बांधों के माध्यम से होता है।

  • DVC के अंतर्गत: तिलैया (कोडरमा), मैथन (धनबाद), पंचेत (धनबाद), बालपहाड़ी (गिरिडीह), और अय्यर।
  • स्वर्णरेखा जल विद्युत परियोजना: यह राँची के ओरमांझी/अनगड़ा क्षेत्र (हुंडरू जलप्रपात) के पास स्थित है। यह विश्व बैंक की सहायता से बनी परियोजना है।

3. निजी क्षेत्र की भागीदारी (Private Sector)

​राज्य में निजी कंपनियाँ भी विद्युत उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं:

  • टाटा पावर: जमशेदपुर और जोजोबेरा क्षेत्र में सक्रिय।
  • अडानी पावर: गोड्डा में स्थित (यहाँ उत्पादित बिजली का एक बड़ा हिस्सा बांग्लादेश को निर्यात किया जाता है)।
  • आधुनिक पावर: सरायकेला-खरसावां जिले में स्थित।

​4. महत्वपूर्ण सांख्यिकी और प्रशासनिक ढांचा

  • प्रति व्यक्ति खपत: झारखण्ड में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत 853 kWh है, जो राष्ट्रीय औसत (1,255+ kWh) से काफी कम है।
  • प्रशासनिक परिवर्तन: 6 जनवरी 2014 को 'झारखण्ड राज्य विद्युत बोर्ड' (JSEB) के विघटन के बाद झारखण्ड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने कार्य करना शुरू किया।
  • उत्पादन का वितरण:
    • राज्य सरकार के अधीन: लगभग 554 मेगावाट क्षमता।
    • केंद्र सरकार (DVC/NTPC) के अधीन: लगभग 1,507 मेगावाट क्षमता।

झारखण्ड की प्रमुख ताप विद्युत परियोजनाएँ

​झारखण्ड में बिजली का मुख्य स्रोत कोयला आधारित ताप विद्युत है। राज्य में प्रमुख रूप से DVC (दामोदर घाटी निगम), NTPC और राज्य सरकार की इकाइयाँ कार्यरत हैं।

​1. दामोदर घाटी निगम (DVC) के अधीन परियोजनाएँ

परियोजना

स्थान

क्षमता

विशेष तथ्य

बोकारो ताप विद्युत गृह

बोकारो थर्मल

500 MW

देश का प्रथम कोयला आधारित ताप विद्युत गृह (1953)। BHEL द्वारा नया प्लांट निर्मित।

चंद्रपुरा ताप विद्युत गृह

चंद्रपुरा (बोकारो)

500 MW

स्थापना 1965 में। DVC की एक महत्वपूर्ण इकाई।

कोडरमा ताप विद्युत गृह

बांडेडीह (कोडरमा)

1000 MW

2013-15 में परिचालन शुरू। (500 MW की 2 इकाइयाँ)।

मैथन पावर लिमिटेड (MPL)

निरसा (धनबाद)

1050 MW

देश का पहला PPP (सार्वजनिक-निजी साझेदारी) उपक्रम। टाटा पावर + DVC का संयुक्त उद्यम।

नोट: मैथन पावर लिमिटेड भारत का पहला ऐसा प्लांट है जिसने 'सब-क्रिटिकल' के बजाय उन्नत तकनीक का प्रयोग किया।

​2. NTPC एवं संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures)

पतरातु विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (PVUNL)

  • अवस्थिति: रामगढ़ जिला (नलकरी नदी के तट पर)।
  • स्थापना: 15 अक्टूबर, 2015 (NTPC 74% और JBVNL 26% की हिस्सेदारी)।
  • क्षमता: कुल लक्ष्य 4,000 MW (800 MW की 5 इकाइयाँ)।
  • इतिहास: पूर्व में यहाँ 1973 में रूस (USSR) के सहयोग से 840 MW का प्लांट लगा था।
  • विशेष: यहाँ उत्पादित बिजली का 85% झारखण्ड राज्य को मिलेगा।

उत्तरी कर्णपुरा ताप विद्युत परियोजना

  • अवस्थिति: टंडवा (चतरा जिला)।
  • संचालन: NTPC द्वारा।
  • क्षमता: 1,980 MW (660 MW की 3 इकाइयाँ)।
  • लाभार्थी राज्य: झारखण्ड (500 MW), बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल।

​3. झारखण्ड सरकार के अधीन परियोजनाएँ

तेनुघाट ताप विद्युत निगम लिमिटेड (TVNL)

  • अवस्थिति: ललपनिया (बोकारो जिला), तेनुघाट बांध के समीप।
  • स्थापना: 26 नवंबर, 1987।
  • क्षमता: 420 MW (210 MW की 2 इकाइयाँ)।
  • मुख्यालय: हिनू, राँची।
  • विशेष: यह पूर्णतः झारखण्ड सरकार के स्वामित्व वाली परियोजना है।

झारखण्ड की अन्य ताप विद्युत परियोजनाएँ (निजी क्षेत्र)

​झारखण्ड में सरकारी उपक्रमों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी भी ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण है।

​1. टाटा पावर लिमिटेड (Tata Power Limited)

  • स्थान: जोजोबेरा (जमशेदपुर)।
  • विशेषता: झारखण्ड में निजी क्षेत्र की सर्वप्रथम विद्युत परियोजना।
  • इतिहास: इसकी शुरुआत अप्रैल 1997 में टाटा स्टील की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 67.5 MW की इकाई के रूप में हुई थी।
  • वर्तमान क्षमता: कुल क्षमता 547 MW है।
    • ​इसमें कोयला आधारित ताप विद्युत के साथ-साथ 'वेस्ट हीट' (अवशेष ताप) से 120 MW और सौर ऊर्जा से 8 MW का उत्पादन भी शामिल है।

​2. अडानी पावर लिमिटेड (Adani Power Limited)

  • स्थान: गोड्डा जिला (लगभग 425 एकड़ में विस्तृत)।
  • विशेषता: यह राज्य की निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी विद्युत परियोजना है।
  • SEZ दर्जा: इसे विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zone) के तहत स्थापित किया गया है।
  • क्षमता: कुल क्षमता 1,600 MW (800 MW की दो इकाइयाँ)।
  • निर्यात: इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ उत्पादित बिजली का लगभग 1,496 MW हिस्सा बांग्लादेश को निर्यात करने के लिए अनुबंधित है।

​3. इनलैंड पावर लिमिटेड (Inland Power Limited)

  • स्थान: गोला प्रखण्ड, रामगढ़ (गाँव: चितरपुर/तीनागातू)।
  • क्षमता: इसकी कुल उत्पादन क्षमता 63 MW है।
  • वितरण: इसके द्वारा उत्पादित बिजली का वितरण झारखण्ड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) के माध्यम से किया जाता है।

​4. आधुनिक पावर लिमिटेड (Adhunik Power & Natural Resources Ltd.)

  • स्थान: पदमपुर और श्रीरामपुर (सरायकेला-खरसावां जिला)।
  • स्थापना: वर्ष 2012 में।
  • क्षमता: इसकी कुल उत्पादन क्षमता 270 MW (प्रथम चरण) है। यह कोयला आधारित (Coal-based) परियोजना है।

झारखण्ड की जल विद्युत परियोजनाएँ

​झारखण्ड में जल विद्युत का विकास मुख्यतः दामोदर घाटी निगम (DVC) और स्वर्णरेखा परियोजना के माध्यम से हुआ है।

​1. तिलैया जल विद्युत केंद्र (1953)

  • स्थान: कोडरमा जिला, बराकर नदी पर।
  • विशेषता: यह झारखण्ड की प्रथम जल विद्युत परियोजना है।
  • क्षमता: इसकी वर्तमान स्थापित क्षमता 4 MW (2x2 MW) है। ​सुधार: आपके नोट्स में '4000 MW' लिखा है, जो कि अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट (UMPP) का लक्ष्य था, लेकिन जल विद्युत केंद्र की क्षमता 4 मेगावाट ही है।
  • सुधार: आपके नोट्स में '4000 MW' लिखा है, जो कि अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट (UMPP) का लक्ष्य था, लेकिन जल विद्युत केंद्र की क्षमता 4 मेगावाट ही है।

    ​2. मैथन जल विद्युत केंद्र (1957)

    • स्थान: धनबाद जिला, बराकर नदी पर।
    • विशेषता: यह गैस टरबाइन पर आधारित झारखण्ड का एकमात्र केंद्र है। यह दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी तरह का पहला भूमिगत (Underground) जल विद्युत केंद्र है।
    • क्षमता: 60 मेगावाट (20 MW की 3 इकाइयाँ)।

    ​3. कोनार जल विद्युत केंद्र (1955)

    • स्थान: हजारीबाग जिला, कोनार नदी पर।
    • विशेषता: यह भी DVC के अधीन है। इसकी क्षमता 40 मेगावाट है। यह एक भूमिगत केंद्र के रूप में निर्मित है।

    ​4. पंचेत जल विद्युत केंद्र (1959)

    • स्थान: धनबाद (झारखण्ड) और पुरुलिया (प. बंगाल) की सीमा पर, दामोदर नदी पर।
    • क्षमता: 80 मेगावाट (40 MW की 2 इकाइयाँ)। दूसरी इकाई 1991 में शुरू हुई।

    ​5. अय्यर एवं बाल पहाड़ी परियोजना

    • अय्यर: दामोदर नदी पर स्थित, क्षमता 45 मेगावाट
    • बाल पहाड़ी: गिरिडीह जिला, बराकर नदी पर प्रस्तावित/स्थित, क्षमता 20 मेगावाट

    ​6. स्वर्णरेखा जल विद्युत परियोजना (1989)

    • स्थान: राँची जिला, स्वर्णरेखा नदी पर।
    • सहयोग: यह परियोजना विश्व बैंक की सहायता से झारखण्ड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा (न कि उत्तरी अफ्रीका) के संयुक्त प्रयास से बनी है।
    • विशेषता: हुंडरू जलप्रपात से लगभग 130 मेगावाट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य है।
    • जलापूर्ति: इसके लिए जल की आपूर्ति गेतलसूद बांध से की जाती है। इसका संचालन JBVNL द्वारा किया जा रहा है।

    ​7. कोयल-कारी परियोजना (प्रस्तावित)

    • नदियाँ: दक्षिणी कोयल एवं कारो नदी।
    • स्थान: राँची, गुमला और पश्चिमी सिंहभूम जिले।
    • क्षमता: कुल लक्ष्य 732 मेगावाट
    • वर्तमान स्थिति: स्थानीय जन-विरोध के कारण यह परियोजना लंबे समय से स्थगित रही है।

    ​8. हाइड्रो पावर प्लांट/एल्टा (Micro Hydel Projects)

    • ​राज्य की छोटी नदियों पर छोटे-छोटे 'हाइड्रो पावर प्लांट' (एल्टा) लगाने का प्रस्ताव है।
    • ​इनकी लागत कम (लगभग 1 रुपये प्रति यूनिट) आती है और ये स्थानीय ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए प्रभावी हैं।

झारखण्ड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL)

​झारखण्ड राज्य में बिजली के वितरण और आपूर्ति की जिम्मेदारी JBVNL की है। यह राज्य की सबसे बड़ी बिजली वितरण कंपनी (Discom) है।

​संगठनात्मक ढांचा (Post-2014)

​6 जनवरी, 2014 को झारखण्ड राज्य विद्युत बोर्ड (JSEB) के विघटन के बाद, राज्य के बिजली क्षेत्र को चार प्रमुख निगमों में विभाजित किया गया:

  1. झारखण्ड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL): यह एक होल्डिंग कंपनी है जो अन्य तीनों निगमों की देखरेख करती है।
  2. झारखण्ड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL): इसका मुख्य कार्य राज्य के खुदरा और थोक उपभोक्ताओं को बिजली वितरण (Distribution) करना है।
  3. झारखण्ड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड (JUUNL): इसका कार्य राज्य में बिजली का उत्पादन (Generation) करना है।
  4. झारखण्ड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड (JUSNL): यह कंपनी बिजली के संचरण/ट्रांसमिशन (Transmission) का कार्य करती है।

​प्रमुख पहल और कार्यक्रम (Initiatives)

​JBVNL ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार और उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण पोर्टल और योजनाएं शुरू की हैं:

  • सक्षम (SAKSHAM): इसका उद्देश्य बिजली विभाग के कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि करना और उनके कौशल को विकसित करना है।
  • सरल-समीक्षा (Saral-Samiksha): यह एक ऑनलाइन प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग तकनीक है। इसके माध्यम से विभाग में चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की रियल-टाइम निगरानी की जाती है।
  • सुविधा (SUVIDHA): 'सौभाग्य योजना' (प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना) के तहत राज्य के सभी घरों (न कि चर्चों) को बिजली कनेक्शन प्रदान करने और रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए इस पोर्टल का उपयोग किया गया।
  • सशक्त (SASHAKT): यह उपभोक्ताओं के लिए एक शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म है। इसके माध्यम से उपभोक्ता बिजली से जुड़ी समस्याओं की ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं और फीडबैक दे सकते हैं।

झारखण्ड में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy)

​झारखण्ड में भौगोलिक स्थिति के कारण सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं। राज्य अब कोयले (पारंपरिक ऊर्जा) से हटकर स्वच्छ ऊर्जा की ओर कदम बढ़ा रहा है।

​1. ऊर्जा क्षमता एवं वर्तमान स्थिति

  • सौर ऊर्जा क्षमता: झारखण्ड में सौर विकिरण की अच्छी उपलब्धता के कारण लगभग 18,180 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता आंकी गई है।
  • कुल नवीकरणीय क्षमता: सौर, लघु पनबिजली (Small Hydel), बायोमास और कचरे से ऊर्जा को मिलाकर कुल क्षमता 18,870 मेगावाट संभावित है।
  • वर्तमान योगदान: वर्तमान में कुल ऊर्जा उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा बहुत कम (लगभग 1% से कम) है, जिसे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • DVC की पहल: दामोदर घाटी निगम द्वारा मैथन (धनबाद) और अन्य क्षेत्रों में सौर इकाइयों की स्थापना की गई है।

2. झारखण्ड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (JREDA)

  • स्थापना: यह राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नोडल एजेंसी है।
  • कार्य: * सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और लघु पनबिजली परियोजनाओं का क्रियान्वयन।
    • ​ऊर्जा संरक्षण (Energy Conservation) के प्रति जागरूकता और तकनीक को बढ़ावा देना।
    • ​ग्रिड-कनेक्टेड और ऑफ-ग्रिड सौर परियोजनाओं का प्रबंधन।

​3. प्रमुख सौर परियोजनाएँ

सोलर पार्क योजना (Solar Park Scheme)

  • शुरुआत: 12 दिसंबर, 2014 को भारत सरकार द्वारा।
  • लक्ष्य: शुरुआत में 20,000 MW का लक्ष्य था, जिसे 2017 में बढ़ाकर 40,000 MW कर दिया गया। झारखण्ड में भी इसके तहत कई सोलर पार्क प्रस्तावित हैं।

फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट (Floating Solar Power Plant)

  • स्थान: गेतलसूद जलाशय (राँची)
  • क्षमता: प्रथम चरण में 100 मेगावाट
  • विशेषता: यह पानी पर तैरता हुआ सोलर प्लांट होगा, जिससे जमीन की बचत होगी और पानी का वाष्पीकरण भी कम होगा। यह JREDA और भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) का संयुक्त प्रयास है।

​4. अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट (UMPP)

  • पहचान: झारखण्ड में कुल 17 संभावित स्थलों की पहचान की गई है।
  • प्रमुख स्थल: 1. तिलैया (कोडरमा): यहाँ रिलायंस पावर द्वारा प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया था (वर्तमान में विभिन्न कारणों से चर्चा में)। 2. हुसैनाबाद (देवघर): यहाँ राज्य का दूसरा अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।

झारखण्ड सौर ऊर्जा नीति 2022

झारखण्ड सौर ऊर्जा नीति (Jharkhand Solar Power Policy) 2022 राज्य के ऊर्जा परिदृश्य को बदलने के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। इसका मुख्य लक्ष्य अगले 5 वर्षों (2022-2027) में 4,000 मेगावाट सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता प्राप्त करना है।

​यहाँ इस नीति के मुख्य स्तंभ और लक्ष्य दिए गए हैं:

झारखण्ड सौर ऊर्जा नीति 2022: मुख्य लक्ष्य

​राज्य सरकार ने 4,000 मेगावाट के लक्ष्य को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया है:

  • सोलर पार्क (Solar Parks): 3,000 मेगावाट (बड़े स्तर के प्रोजेक्ट्स)।
  • गैर-सोलर पार्क (Non-Solar Parks): 720 मेगावाट (विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा)।
  • रूफटॉप सोलर (Rooftop Solar): 280 मेगावाट (घरों और सरकारी इमारतों की छतों पर)।

नीति की प्रमुख विशेषताएँ

सोलर सिटी (Solar City):

  • गिरिडीह को झारखण्ड की पहली 'सोलर सिटी' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ पूरे शहर की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा होगा।

फ्लोटिंग सोलर (Floating Solar):

  • ​राज्य के जलाशयों (जैसे गेटलसूद, चंडिल, हतिया) का उपयोग सौर पैनल लगाने के लिए किया जाएगा। इससे भूमि अधिग्रहण की समस्या कम होगी।

कैनाल टॉप सोलर (Canal Top Solar):

  • ​नहरों के ऊपर सौर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन के साथ-साथ पानी के वाष्पीकरण को रोकने की योजना है।

कृषि में सौर ऊर्जा (KUSUM Scheme):

  • किसानों को सौर पंप (Solar Pumps) प्रदान करना और बंजर भूमि पर छोटे सौर संयंत्र लगाने के लिए प्रोत्साहित करना।

रियायतें और प्रोत्साहन:

  • सब्सिडी: घरेलू उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर लगाने पर राज्य और केंद्र सरकार द्वारा आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है।
  • सिंगल विंडो क्लीयरेंस: परियोजनाओं की मंजूरी के लिए JREDA के माध्यम से प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है।
  • छूट: सौर परियोजनाओं को क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी गई है।

चुनौतियाँ और भविष्य

​झारखण्ड एक पहाड़ी और जंगली क्षेत्र वाला राज्य है, जहाँ भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) एक बड़ी चुनौती है। इसीलिए यह नीति फ्लोटिंग सोलर, छतों (Rooftop) और बंजर भूमि के उपयोग पर अधिक जोर देती है।

एक नज़र में महत्वपूर्ण तथ्य:

  • नोडल एजेंसी: JREDA (Jharkhand Renewable Energy Development Agency)।
  • लक्ष्य वर्ष: 2027।
  • कुल लक्ष्य: 4,000 MW।

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