RBI: मौद्रिक नीति, बैंकिंग विनियमन और वर्तमान परिदृश्य


भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भारत का केंद्रीय मौद्रिक प्राधिकरण और बैंकिंग प्रणाली का सर्वोच्च नियामक है। RBI अधिनियम, 1934 और बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के अंतर्गत, RBI देश की आर्थिक स्थिरता को नियंत्रित करता है।

1. मौद्रिक नीति का नियंत्रण (Control of Monetary Policy)

मौद्रिक नीति वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से RBI अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति (Money Supply) को विनियमित करता है। इसका प्राथमिक उद्देश्य मुद्रास्फीति (Inflation) को 4% (+/- 2%) के दायरे में रखना और विकास को बढ़ावा देना है।

मौद्रिक नीति समिति (MPC): ब्याज दरों पर निर्णय लेने के लिए एक 6-सदस्यीय समिति होती है (3 RBI से, 3 सरकार द्वारा नियुक्त)।

वर्तमान प्रमुख नीतिगत दरें (Current Policy Rates):

(नोट: ये दरें मौद्रिक नीति समिति की द्वैमासिक बैठक के आधार पर बदल सकती हैं)

विवरण (Instrument)दर (Rate)उद्देश्य
रेपो रेट (Repo Rate)6.50%वह दर जिस पर बैंक RBI से अल्पकालिक ऋण लेते हैं।
स्थायी जमा सुविधा (SDF)6.25%बिना कोलेटरल के अतिरिक्त तरलता सोखने की दर।
सीमांत स्थायी सुविधा (MSF)6.75%बैंकों के लिए आपातकालीन उधार दर।
बैंक रेट (Bank Rate)6.75%दीर्घकालिक ऋणों के लिए दर।
नकद आरक्षित अनुपात (CRR)4.50%कुल जमा का वह हिस्सा जो नकद रूप में RBI के पास रहता है।
वैधानिक तरलता अनुपात (SLR)18.00%जमा का वह हिस्सा जो बैंक अपने पास (सोना/बॉन्ड में) रखते हैं।

2. बैंकिंग संरचना का विनियमन (Regulation of Banking Structure)

RBI जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा और वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) के लिए नियामक और पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करता है।

  • पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy): बैंकों को वित्तीय झटके सहने के लिए बेसल-III (Basel III) मानदंडों का पालन करना होता है। (सार्वजनिक बैंकों के लिए न्यूनतम CAR 12% है)।

  • परिसंपत्ति गुणवत्ता (NPA Management): RBI फंसे हुए कर्ज (NPAs) की पहचान और समाधान के लिए कड़े नियम लागू करता है।

  • सहकारी बैंक: शहरी और बहु-राज्य सहकारी बैंकों को अब सीधे RBI की निगरानी में लाया गया है।

  • पर्यवेक्षी तकनीक (SupTech): RBI अब बैंकों की निगरानी के लिए 'दक्ष' (DAKSH) जैसी उन्नत निगरानी प्रणाली का उपयोग करता है।


3. हालिया घटनाक्रम और प्रमुख पहल (Current Affairs & Initiatives)

RBI द्वारा हाल ही में बैंकिंग और वित्त के क्षेत्र में कई क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं:

  • ई-रुपी (e-Rupee / CBDC):

    RBI ने अपनी डिजिटल मुद्रा 'सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी' (CBDC) का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह नकद का डिजिटल संस्करण है, जो ब्लॉकचेन जैसी तकनीक पर आधारित है। इसे थोक (Wholesale) और खुदरा (Retail) दोनों क्षेत्रों में परीक्षण किया जा रहा है।

  • उद्गम पोर्टल (UDGAM Portal):

    RBI ने "Unclaimed Deposits - Gateway to Access inforMation" (UDGAM) पोर्टल लॉन्च किया है। इसके माध्यम से आम जनता विभिन्न बैंकों में पड़े अपने लावारिस या दावा न किए गए जमा (Unclaimed Deposits) को एक ही जगह पर खोज सकती है।

  • घर्षण रहित ऋण (Frictionless Credit):

    RBI ने 'Public Tech Platform for Frictionless Credit' (PTPFC) की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य लोन देने की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और कागज-रहित बनाना है, जिससे किसानों और MSMEs को मिनटों में लोन मिल सके।

  • UPI में नवाचार (UPI Innovations):

    • UPI Lite: छोटे भुगतान (₹500 तक) बिना पिन के करने की सुविधा।

    • Credit Line on UPI: अब बैंक अपने ग्राहकों को UPI के माध्यम से प्री-सैंक्शन क्रेडिट (ऋण) का उपयोग करने की अनुमति दे सकते हैं।

    • Cash Deposit via UPI: जल्द ही UPI के जरिए एटीएम में नकदी जमा करने की सुविधा शुरू की जा रही है।

  • घरेलू व्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण बैंक (D-SIBs):

    RBI ने SBI, HDFC Bank, और ICICI Bank को D-SIBs (Too Big To Fail) के रूप में वर्गीकृत करना जारी रखा है। इन बैंकों को अतिरिक्त पूंजी सुरक्षित रखनी होती है क्योंकि इनका डूबना अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।

  • ग्रीन डिपॉजिट्स (Green Deposits):

    RBI ने बैंकों के लिए 'ग्रीन डिपॉजिट' स्वीकार करने के लिए रूपरेखा जारी की है, जिसका उपयोग केवल पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं (जैसे नवीकरणीय ऊर्जा) के वित्तपोषण के लिए किया जाएगा।

निष्कर्ष

RBI न केवल रेपो रेट के माध्यम से महंगाई को नियंत्रित कर रहा है, बल्कि CBDC और UPI जैसे डिजिटल नवाचारों के माध्यम से भारत की बैंकिंग व्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार भी कर रहा है।

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