भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्यों को साधने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में पारित Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Act 2025 ने देश के परमाणु क्षेत्र में व्यापक बदलावों का मार्ग प्रशस्त किया है [1]।
आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि SHANTI Act क्या है, इसके प्रमुख प्रावधान क्या हैं और इसके साथ क्या चुनौतियाँ जुड़ी हैं।
आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि SHANTI Act क्या है, इसके प्रमुख प्रावधान क्या हैं और इसके साथ क्या चुनौतियाँ जुड़ी हैं।
वर्तमान स्थिति और बदलाव की आवश्यकता
वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल ऊर्जा में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी केवल 3.1% है और वर्तमान परमाणु क्षमता 8.78 GW है। भारत के तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम (PHWR, Fast Breeder Reactor, और Thorium Based Reactors) को गति देने और 'नेट-जीरो 2070' के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कानूनी और ढांचागत सुधारों की आवश्यकता थी।
SHANTI Act 2025: प्रमुख बदलाव
यह नया अधिनियम पुराने Atomic Energy Act (1962) और Civil Liability for Nuclear Damage Act (2010) को निरस्त करता है। इसके तहत निम्नलिखित महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
1. निजी क्षेत्र की भागीदारी: इस अधिनियम के माध्यम से परमाणु क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए एक ढांचा तैयार किया गया है और विशिष्ट परमाणु गतिविधियों में 49% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी गई है।
2. दायित्व कानूनों में परिवर्तन (Liability Reform): सबसे बड़ा बदलाव 'सप्लायर लायबिलिटी' (Supplier Liability) को हटाना है। अब परमाणु दायित्व व्यवस्था को Convention on Supplementary Compensation (CSC) के साथ जोड़ा गया है और क्षमता-आधारित दायित्व सीमा (Capacity-Based Liability Cap) तय की गई है।
3. नियामक सुधार: Atomic Energy Regulatory Board (AERB) को अब वैधानिक दर्जा (Statutory backing) प्राप्त होगा। इसके अलावा, परमाणु संचालन और अनुबंधों से जुड़े विवादों के त्वरित समाधान के लिए Atomic Energy Redressal Commission का गठन किया जाएगा।
परमाणु ऊर्जा मिशन और SMRs का उदय
SHANTI Act के साथ ही केंद्रीय बजट 2025-26 में 'Nuclear Energy Mission' की घोषणा की गई है। इसके लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिनका उपयोग Small Modular Reactors (SMRs) के डिजाइन, विकास और तैनाती के लिए किया जाएगा।
* लक्ष्य है कि 2033 तक पांच स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए SMRs का संचालन शुरू हो जाए।
* यह अधिनियम औद्योगिक उपयोग और कैप्टिव बिजली उत्पादन (Captive power generation) के लिए SMRs की तैनाती की सुविधा प्रदान करता है।
इस पहल का महत्व (Significance)
यह नया कानून भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
* ऊर्जा सुरक्षा: यह बेस-लोड (Base-load) ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करेगा और आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करेगा।
* पर्यावरण के अनुकूल: यह भारत के 'नेट-जीरो 2070' लक्ष्यों के अनुरूप एक डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization) का रास्ता तैयार करता है।
* भूमि उपयोग में दक्षता: नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की तुलना में परमाणु ऊर्जा का घनत्व अधिक है, जिससे समान उत्पादन के लिए कम भूमि की आवश्यकता होती है।
चुनौतियाँ और चिंताएँ
हालाँकि, इस अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर गंभीर सवाल भी उठाए जा रहे हैं:
* जवाबदेही का अभाव: *Down to Earth* के अनुसार, 'पूर्ण दायित्व सिद्धांत' (Absolute Liability Principle) और 'एहतियाती सिद्धांत' (Precautionary Principle) को कमजोर किया गया है। सप्लायर लायबिलिटी को हटाने से एक 'जवाबदेही वैक्यूम' (Accountability Vacuum) पैदा हो सकता है।
* RTI का उल्लंघन: अधिनियम की धारा 39(4) स्पष्ट रूप से RTI Act, 2005 को ओवरराइड करती है, जिससे सूचना की विषमता (Information Asymmetry) की समस्या पैदा हो सकती है।
* पर्यावरणीय छूट: परमाणु परियोजनाओं को पर्यावरणीय अनुपालन से व्यापक छूट दी गई है, जो चिंता का विषय है।
* शिकायत का अधिकार: विधेयक उन लोगों को सीमित करता है जो परमाणु अपराधों के लिए आपराधिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
यह नया कानून भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
* ऊर्जा सुरक्षा: यह बेस-लोड (Base-load) ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करेगा और आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करेगा।
* पर्यावरण के अनुकूल: यह भारत के 'नेट-जीरो 2070' लक्ष्यों के अनुरूप एक डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization) का रास्ता तैयार करता है।
* भूमि उपयोग में दक्षता: नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की तुलना में परमाणु ऊर्जा का घनत्व अधिक है, जिससे समान उत्पादन के लिए कम भूमि की आवश्यकता होती है।
चुनौतियाँ और चिंताएँ
हालाँकि, इस अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर गंभीर सवाल भी उठाए जा रहे हैं:
* जवाबदेही का अभाव: *Down to Earth* के अनुसार, 'पूर्ण दायित्व सिद्धांत' (Absolute Liability Principle) और 'एहतियाती सिद्धांत' (Precautionary Principle) को कमजोर किया गया है। सप्लायर लायबिलिटी को हटाने से एक 'जवाबदेही वैक्यूम' (Accountability Vacuum) पैदा हो सकता है।
* RTI का उल्लंघन: अधिनियम की धारा 39(4) स्पष्ट रूप से RTI Act, 2005 को ओवरराइड करती है, जिससे सूचना की विषमता (Information Asymmetry) की समस्या पैदा हो सकती है।
* पर्यावरणीय छूट: परमाणु परियोजनाओं को पर्यावरणीय अनुपालन से व्यापक छूट दी गई है, जो चिंता का विषय है।
* शिकायत का अधिकार: विधेयक उन लोगों को सीमित करता है जो परमाणु अपराधों के लिए आपराधिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
निष्कर्ष
SHANTI Act 2025 भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई दिशा देने का प्रयास है। जहाँ एक ओर यह ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी विकास को बढ़ावा देता है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा मानकों और पारदर्शिता पर उठने वाले सवालों का समाधान करना भी आवश्यक है।